Saturday, November 3, 2018

भारत की नदियां एवं झिलो का संक्षिप्त वर्णन

मानसून जलवायु के परिप्रेक्ष्य में नदियों का भारत में विशेष महत्व है भारतीय सभ्यता और संस्कृति का विकास इन नदी घाटियों में हुआ है यहां के अधिकांश ऐतिहासिक व धार्मिक महत्व के नगर नदियों के किनारे बसे हैं जल जल विद्युत संयंत्र आंतरिक जल परिवहन औद्योगिक उपयोग आदि की सुविधाओं के कारण भारत के आर्थिक विकास में नदियों का महत्व स्थान है आज के प्रमुख औद्योगिक व्यापारिक केंद्र भी नदियों के किनारे विकसित हुए हैं हमारे देश में दशकों में कम वर्षा के कारण जल की कमी होने से नदियों के जल का महत्व व्यापक रूप से बढ़ गया है

भारत की नदियों के अपवाह क्रम को उत्पत्ति विभाग के आधार पर निबंध भागों में बांटा जा सकता है हिमालय की नदियां या उत्तर भारत की नदियां पराया दक्षिण भारत की नदियां आंतरिक अपवाह वाली नदियां
उत्तर भारत की नदियां
उत्तर भारत के अधिकांश नालियां हिमालय पर्वत से ही निकलती है यह नदियां वर्ष पर बैठी है क्योंकि इन का उद्गम स्थान हिमनदी होता है यहां की नदियों को तीन भागों में बांटा जा सकता है सिंधु नदी गंगा नदी ब्रह्मपुत्र नदी
सिंधु नदी कर्म मैं सिंधु और उसकी सहायक नदियों सतलज व्यास चुनावी वेदलम शामिल है इसका जल ग्रहण क्षेत्र लगभग 1100000 वर्ग किलोमीटर है जिसमें से सवा 300000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र भारत में तथा शेष पाकिस्तान में चला गया है पता दिन नदियों का ऊपरी प्रवाह क्षेत्र ही हमारे देश में है इनका निचला प्रवाह क्षेत्र पाकिस्तान में नदी का उद्गम कैलाश पर्वत के दक्षिण ध्रुव पर मानसरोवर झील के निकट राक्षस ताल से इस नदी पर पंजाब में रोपड़ के पास भाखड़ा नांगल बांध बनाया गया है आगे जाकर यह व्यास में मिल जाता है झेलम नदी पर प्रसिद्ध पर्यटक सिंह नगर बसा हुआ है

गंगा नदी कर्म से गंगा नदी का उद्गम गंगोत्री हिम्मत से है देवप्रयाग में अलकनंदा और भागीरथी जनता रहे मिलकर गंगा नदी बनाती है यह हरिद्वार के निकट मैदानी भाग में प्रवेश करती है गंगा के प्रमुख साइट यमुना नदी यमुनोत्री से निकलती है विंध्याचल पर्वत से निकलकर चंबल बेतवा वैकेंसी नदियां जमुना में मिलती है यमुना नदी इलाहाबाद के गंगा के नाम से जानी जाती है उत्तर में रामगंगा गोमती घाघरा गंडक को शिवम महानंदा तथा दक्षिण से फोन आदि नदियों के मिलाकर गंगापुर का के निकट बांग्लादेश में प्रवेश करती है या इस पद्मा नदी का आदत है जो बंगाल की खाड़ी में गिरने से पहले ब्रह्मपुत्र से मिलकर डेल्टा बनाती है गंगा ब्रह्मपुत्र डेल्टा सुंदरवन विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा है

धर्मपुत्र कम कम से ब्रह्मपुत्र नदी तिब्बत में मानसरोवर झील के निकट कैलाश पर्वत से निकलकर पूर्व में बैठी हुई माली के पूर्वी छोर तक जाती है यहां इस सांगपो नदी के यहां से दक्षिण-पश्चिम में मुड़ कर यह नदी असम में बैठी हुई बांग्ला में जाकर मिल जाती है इसकी सहायक नदियां जैसे दीवानों इसके विपरीत दिशा में आकर मिलती है इस के दोहे किनारे पर मिलने वाली सहायक नदियां बार्ली शबीर मानस आदि है दिमाग लोहित कब पीली धनसिरि बुरी दी हिंदी नदिया किनारे पर मिलती है इसे परवाह में मिट्टी की अधिकता होती है डेल्टा ही भाग में गंगा ब्रह्मपुत्र नदी मधुमक्खी पद्मावत सरस्वती हुगली भागीरथी आदि जल धाराओं में बढ़ जाती है
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