Thursday, November 1, 2018

खाद्य संसाधन तथा वन संसाधन

वन संसाधन एवं खाद्य संसाधन

वन संसाधन

पौधे और वन मनुष्य के लिए अत्यंत उपयोगी है इनका प्रयोग में अधिकार से करता आ रहा है भारतीय संस्कृति में वृक्षों का महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है वैदिक काल में ऋषि वनों में रहकर चिंतन करते थे प्रत्येक नगरिया गांव के पास 1 खंड गोचर भूमि छोड़ी जाती थी जिसे निवासी लकड़ी का इंजन प्राप्त करते थे हमारे देश में वनों का इंसाफ करोड़ 53 लाख से 6 करोड से तलाक फैक्ट्री भूमि है जो कुल भूमि का लगभग 20% है राष्ट्रीय वन नीति के अनुसार देश के 33% भाग में वन होने चाहिए इस तथ्य को केवल अरुणाचल प्रदेश मणिपुर में अंडमान निकोबार दीप समूह ही पूरा करते हैं वनों का निरंतर कम होता है चेतन का विषय है इसका मुख्य कारण खनन किया द्वारा वनों का काटना औद्योगिक क्षेत्रों में वृद्धि इमारती वे चलो लकड़ी की आवश्यकता रेल मार्ग हाईवे सड़क निर्माण बांध पुल निर्माण कागज निर्माण आदि है यह संसाधन को बचाने हेतु नियम उपाय किए जाने चाहिए

(1) लकड़ी के स्थान पर रे क्लिप ऊर्जा स्रोत काम लिया जावे(2) सामाजिक वानिकी कृषि वानिकी से प्रत्याशा दिया जाए(3) चारा गए क्षेत्र आवश्यक रूप से संक्षिप्त किए जाएं(4) ऐसी नदी घाटी परियोजना में तथा बांध पुल बनाने की अनुमति नहीं दी जावे जिनसे जीवन से वन क्षेत्र डूब जाते हैं(5) कृषि योग्य भूमि विस्तार के लिए वन क्षेत्र के हॉट्स को रोका जावे इस हेतु कड़े कानून बनाकर उनकी सुरक्षा की जावे
वन संरक्षण के लिए सरकारी स्तर पर किए जा रहे हैं कार्यों में उद्देश्यों की सफलता के लिए आम नागरिक अपनी भूमिका का उचित निर्वहन करें

खाद्य संसाधन
विश्व की बढ़ती जनसंख्या को भरपेट भोजन प्रदान करना सबसे बड़ी चुनौती है खाद्य पदार्थ हमारे शरीर के लिए ऊर्जा के स्रोत हैं आजादी के समय हमारा कृषि उत्पादन 45 मिलियन टन था हमें अनाज का याद करना पड़ता था 1959 से 7 को पंचवर्षीय योजना में कृषि को विशेष महत्व दिया गया भारत में हरित क्रांति की शुरुआत हुई

 उत्पादन में देश आत्मनिर्भर हुआ हरित क्रांति में सघन कृषि को बढ़ावा दिया गया इसमें रासायनिक उर्वरक कीटनाशक वार्ना सी कवकनाशी रसायनों का भरपूर प्रयोग हुआ यदि उन्नत बीज में खरपतवार नियंत्रण से पैदा वाले रसायनों से मरदह स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा मर्दों में राशियों का प्रभाव खाद्य उत्पादन पर पशु चारे से दुग्ध उत्पादों पर मानव स्वास्थ्य पर पड़ने लगा उसके साथ साधनों से जल स्रोत में गैसों का प्रभाव से वायु प्रदूषण बड़ा देश में लगभग एक लाख कीट नाशी रसायनों का प्रयोग होता है इनमें 70% ऐसे हैं जो यूरोप से प्रतिबंधित है को देखते हुए उन्हें जैविक खेती की बात की जा रही है इसमें हानिकारक रसायनों के प्रयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है

दूसरी ओर हरित क्रांति के दौरान का विस्तार हुआ ओं के आसपास में जल की मात्रा बढ़ने से नष्ट होते जाते हैं प्रसिद्ध भारतीय कृषि वैज्ञानिक डॉ एम एस स्वामीनाथन के अनुसार योजनाओं के प्रभाव से मृदा में लोगों की मात्रा बढ़ जाती है यह मर्दा सत्य पर जाते हैं इस तरह देश में लगभग 7000000 हेक्टेयर कृषि भूमि लवणीयता से प्रभावित है
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