Thursday, November 1, 2018

ऊर्जा के परंपरागत स्रोत

ऊर्जा के परंपरागत स्रोत

खनिज कोयला:  खनिज कोयला करोड़ो वर्षो से भूमि में दबे जीव रक्षा हुए अफसोस है कालांतर में भूमि दावे ताप के प्रभाव से यह पत्र की प्रति कठोर में चलने वाले पदार्थ के रूप में प्रकट में खनिज कोयला के प्रकार का होता है जैसे विटामिन लिग्नाइट वेबसाइट इन में सबसे अधिक ऊर्जावान कोयला साइड होता है जिसमें 90% कार्बन पाया जाता है कोयले के चलने से वायु प्रदूषण होता है इसे वायुमंडल में सल्फर डाइऑक्साइड कार्बन डाइऑक्साइड अधिक गैस से बढ़ जाने से वायु प्रदूषण होता है उनके कोयले का प्रयोग फैक्ट्रियों तापीय विद्युत परिजनों में होता है इनसे न केवल वायु प्रदूषण होता है बल्कि कोयले की राख का निस्तारण कर पाना जटिल समस्या है

पेट्रोलियम: भूमिगत अवसादी शैलों से खनिज तेल की प्राप्ति होती है हाइड्रोकार्बन यौगिक के मिश्रण है खनिज पेट्रोलियम के शुद्धिकरण द्वारा हाई स्पीड पैट्रोल डीजल में केरोसिन प्राप्त होता है इनका उपयोग मुख्य थे वायुयान रेलवे इंजन में सड़क परिवहन बस कार ट्रैक्टर में होता है

विश्व का 50% तेल उत्पादन खाड़ी देशों के सऊदी अरब ईरान इराक कुवैत संयुक्त अरब अमीरात कतर में क्या जाता है इनमें से मात्र 2 देश सऊदी अरब में ईरान विश्व का 40% पेट्रोलियम उत्पादन करते हैं इसके अतिरिक्त संयुक्त राज्य अमेरिका रूस वेनेजुएला मैक्सिको वे भारत तथा इंडोनेशिया आदि देशों में पेट्रोलियम उत्पादन होता है हमारे देश में पेट्रोल के उत्पादन में भर्ती हो रही है मुंबई हाई असम तथा पश्चिमी राजस्थान में रामगढ़ को आलिया देवा ने लागे वालों से जैसलमेर के निकट स्थापित किए गए पेट्रोलियम पदार्थों के प्रयोग से भी लेड ऑक्साइड कार्बन डाइऑक्साइड गैस उत्पन्न होती वायुमंडल को प्रदूषित करती है

 प्राकृतिक गैस: पिछले 10 वर्षों में प्राकृतिक गैसों के प्रयोग में कई गुना वृद्धि हुई है प्राकृतिक गैस से हाइड्रोकार्बन युक्त भूगर्भीय संसाधने इन में मिथेन में जलन सील गैसों की अधिकता होती है इनका प्रयोग रसोई गैस के घरेलू इंधन के रुप में उद्योगों एवं विद्युत परियोजनाओं में किया जाता है उद्योग जैसे टायर उद्योग सीमेंट उद्योग विद्युत उत्पादन के उत्पादन का 70% उपयोग किया जाता है राजस्थान में जैसलमेर के निकट कमली ताल मनिहारी टिब्बा भाकरी शाहगढ़ के समीप प्राकृतिक गैस के कुएं खोदे गए हैं जो व्यापारिक स्तर पर गैस उत्पादन होता है

बेत्ता जल व पन बिजली
बड़ी नदियों के उपयुक्त स्थानों पर बांध बनाकर पानी की तेज धारा निकल कर इनसे विद्युत टरबाइन ए घुमाई जाती है इस तरह उत्पन्न विद्युत को पनबिजली या जल विद्युत कहते हैं विद्युत उत्पादन के वास्तव में चार साधन है यह कोयला आधारित तापीय विद्युत खेसारी तापीय विद्युत व पन बिजली व धार्मिक विद्युत इनमें से केवल पनबिजली समास के प्रकार का साधन है सभी समाज के प्रकार के हैं पनबिजली से पर्यावरण को किसी तरह की कोई शक्ति नहीं पहुंचती राजस्थान में चंबल नदी नर्मदा नदी पर बांध पर बिजली परियोजनाएं स्थापित की गई है भारत में योजना योजना पनबिजली परियोजनाएं प्रमुख है
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