Sunday, November 4, 2018

भारतीय संस्कृति में गुरु शिष्य के संबंध को जानिए


  • भारतीय संस्कृति में गुरु शिष्य संबंध के बारे में जानिए और देखिए

श्री आनंद शंकर माधवन का जन्म केरल मध्य प्रदेश के के विलन जिले में हुआ डॉक्टर जाकिर हुसैन के संपर्क में आने से हिंदू मुस्लिम के मधुर संबंधों के पक्षधर बने गए महात्मा गांधी के भारत छोड़ो आंदोलन में भी मधुबनी जी का सक्रिय सहभाग रहा जेल में रहकर हिंदी भाषा का अध्ययन किया जेल से छोड़कर आप भारत भ्रमण को निकल पड़े और बाद में बिहार में मजार विद्यापीठ की स्थापना की सन 1984 में मिशन और सन 1985 में शिव धाम अभिनव शिक्षा नगरी की स्थापना की अब आप तीनों संस्थाओं के संचालक हैं मलयालम तथा तमिल दोनों ही भाषाओं पर पूर्ण अधिकार होने के बावजूद आपने हिंदी साहित्य में सृष्टि की आपके विषयों में दार्शनिक का आधुनिकता एवं आध्यात्मिकता का बाहुल्य हैं बिखेरे ही रे आनंद सलाका हिंदी आंदोलन आमंत्रित मेहमान आरती उषा से जीवनी आदि आप की प्रमुख रचनाएं हैं आमंत्रित मेहमान बिहार राष्ट्रभाषा परिषद द्वारा पुरस्कृत हैं
मधु न जीने प्राचीन गुरु व शिष्य परंपरा की गरिमा को श्रेष्ठ करते हुए वर्तमान शिक्षा प्रणाली पर परोक्ष रूप मैं करारा व्यंग्य किया है हमारे समाज में व्यवसायिक संस्कृति का बोल बाला है इस कारण गुरु शिष्य संबंध में परिवर्तन आया है पहले विद्यालय मंदिर के सामान माने जाते थे शिक्षा देना एक अध्यात्मिक अनुष्ठान था वह परम दुख प्राप्ति का एक माध्यम था उसे जमाने में पैसे देकर शिक्षा खरीदी नहीं जाती थी कि आज वैसी स्थिति है क्या आज शिक्षा के क्षेत्र में मिनिस्टर भी त्याग नजर आता है लेखक ने हमें अंत मूर्ख सोचने के लिए बाध्य किया है
हमारे समाज में व्यवसायिक संस्कृति का बोलबाला हैं इसी कारण गुरु शिष्य संबंधों में परिवर्तन आया है पहले विद्यालय मंदिर के समान माने जाते थे शिक्षा देने एक अध्यात्मिक अनुष्ठान था वह परमेश्वर प्राप्ति का एक माध्यम था पैसे देकर शिक्षा खरीदी नहीं जाती थी आज स्थिति बिल्कुल बदल गई हैं और अब शिक्षण कार्य पट पालन का साधन बन गया है
जिसे भारतीय संस्कृति का जाना चाहिए वह आज भारतीय मानसिक स्थिति में क्रियाशील नहीं है आज एक प्रकार की व्यवस्थित व्यवसायिक संस्कृति व्याप्त है जिसकी जड़ सहित यूरोप में है भारतीयों के सार्वजनिक विहार में गुरु शिष्य संबंध का भी चंदवा रूप परिवर्तन हो गया है यहां गुरु वेतनभोगी नहीं होते थे और ने शिष्य को ही निशुल्क देना पड़ता था पैसे देकर विदा खरीदने की यह क्रिय की क्रिय पद्धति उसे भारतीय मिट्टी का उपज नहीं है शिक्षण यह प्रकार के आश्रम अथवा मंदिर के समान थे गुरु को साक्षात परमेश्वर ही समझा जाता था शीशे पुत्र से अधिक पीली होते थे यहां सम्मान मिलना ही शक्ति पाने का रहस्य हैं प्राचीन काल में गुरु की शिक्षा दान किया उनका आध्यात्मिक अनुष्ठान थी परमेश्वर प्राप्ति उनका एक माध्यम था वह आज पेट पालन का जरिया बन गई है
प्रारंभ में विवेकानंद को भारत में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त नहीं हुआ पर जब उन्होंने अमेरिका नाम जमा लिया तो भारतवासी दौड़ माला लेकर स्वागत करने रवींद्रनाथ ठाकुर को भी नोबेल पुरस्कार मिला तो बंगाली लोग दौड़े यह लापता हुए अम्मा देर ठाकुर अमादार कठोर सुदूर दक्षिण भारत में कुछ समय पहले तक भरतनाट्यम और कत्थक अली को नहीं पूछता था पर जब उसे विदेशों में मान मिलने लगा तो आज श्री से बात वासी सोचने लगे अरे हमारी संस्कृति में इतनी अपूर्ण चीजें भी पड़ी थी क्या यहां के लोगों को अपने खूबसूरती नहीं नजर आती मगर पराई है के सौंदर्य को देखकर मोहित हो जाते है जिसे देश में ज्ञान पाने के लिए मैक्स मूलर ने जीवन भर प्रार्थना कि उसे देश के निवासी आज जर्मनी और विलायत जाना स्वग जैसा अनुभव करते हैं ऐसे लोगों को प्राचीन गुरु शिष्य संबंध की महिमा सुनाना गंदे को गणित सिखाने जैसा वेट प्रयास ही हो सकता है
एक बार सुपरहिट भारतीय पहलवान गामा मुंबई आए उन्होंने विश्व के सारे पहलवानों की कुश्ती में चैलेंज दिया अखबारों में यह समाचार प्रकाशित होते ही एक प्रांसी पत्रकार ने उत्सुक हाउस उनके निकट पहुंच कर उसने पूछा साहब विश्व के किसी भी पहलवान से लड़ने के लिए आप तैयार हैं तो आप अपने प्रमुख शिष्य से ही लड़कर विजय प्राप्त करके दिखाओ गामा आजकल के शिक्षा क्रम में रंगे नहीं थे इसलिए उन्हें इन शब्दों हराने कर दिया आंखें फाड़ कर उसे पत्रकार का चेहरा देखते ही रह गए बाद में धीरे से कहा भाई साहब मैं हिंदुस्तानी हूं हमारा अपना एक निजी रेन सेन है शायद इससे आप परिचित नहीं है जिसे लड़के का आपने नाम लिया वह मेरे पसीने की कमाई मेरा खून है और मेरे बेटे से भी अधिक प्यार है इस में और मुझ में फर्क ही कुछ नहीं है मैं लेट आया वह लड़ा दोनों बराबर ही होगा हमारी इस परंपरा को आप समझने की चेष्टा कीजिए हम लोगों को शिष्य परंपरा अधिक वीर्य हैं ख्याति और प्रभाव में हमें सदा यह चाहते हैं कि हम अपने शिष्यों से कम प्रभावी रहे यानी हमें यही चाहेंगे कि संसार में जितना नाम मैंने कमाया उससे कहीं अधिक मेरे पिता कमाए मुझे लगता है आप हिंदुस्तानी नहीं है
भारत में गुरु शिष्य संबंध का वह रूप आज साधुओं पहलवानों और संगीतकारों में थोड़ा बहुत ही सही पाया जाता है भगवान राम कृष्ण परसों योग्य शिष्य को पाने के लिए पर्यटन करते रह उसके जैसे व्यक्ति को भी उत्तम शीशे के लिए रो रो कर प्रार्थना करनी पड़ी थी इसे समझा जा सकता है कि एक गुरु के लिए उत्तम शिष्य कितना महंगा और महत्वपूर्ण है संतान प्राप्ति व्रत उन्हें दुख नहीं देता पर एक अशिक्षा के रहने के लिए वह एकदम तैयार नहीं होते इस संबंध में भगवान इस साल का यह कथन सदा स्मरणीय है उन्होंने कहा था मेरे अनुयाई लोग मुझसे कहीं अधिक मेहमान है और उसकी जूतियां होने की योग्यता भी मुझ में नहीं है यही बात है गांधीजी बनने की क्षमता किस में है उन्हें गांधीजी अच्छे लगते हैं और वही उसके पीछे चलते हैं विवेकानंद सिर्फ उन्हें पसंद आएंगे जिसमें विवेकानंद बनने की अद्भुत शक्ति निहित है

 कविता के बेसिक सभी कवि से अधिक महान होते हैं संगीत के पागल सुनने वाले ही सभी के संगीतकार से अधिक संगीत का रेसस वर्धन करते हैं यहां पूज्य नहीं पुजारी ही श्रेष्ठ है यहां सम्मान पाने वाले नहीं सम्मान देने वाले मां ने सभी उसमें कुछ नहीं है पुश अप का सोनू जी उसे आने वाले किस दृष्टि में है दुनिया में कुछ नहीं है जो कुछ भी के हैं हमारी चाहे में हमारी दृष्टि में है यह अद्भुत भारतीय व्याख्या अजीब सी लगती है पर हमारे पूर्वज सदा इसी पथ के यात्री रहे हैं
उत्तम गुरु में जाति भावना भी नहीं देती कितने ही मुसलमान पहलवानों के हिंदू चले हैं वह संगीतकारों के मुसलमान शिष्य हैं यहां पर खून की साधना की और प्रतिभा की होती भक्ति और श्रद्धा की की कमियां हैं ने की जाति संप्रदाय आचार विचार या धर्म कि मुझे क्या लिख आया था एक विधान मुसलमान ने की उन्होंने कभी नहीं सोचा कि यह हिंदू है और मुसलमान बनाना चाहिए पुराने जमाने में मौलवी लोग बड़े-बड़े रामायणी होते थे और आज यहां तो मैं भरत मियां अजीज मियां आदि अधिक संख्या में दिखाई देते

  • गुरु शिष्य के संबंध
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