Thursday, November 1, 2018

अपराजिता की कहानी

अपराजिता

कभी-कभी अचानक ही विधाता हमें ऐसे लग सकती तुझसे मिला देता है जिसे देख स्वयं अपने जीवन की रेखता बहुत छोटी लगने लगती है अमिताभ लगता है कि भले ही उस अंतर्यामी ने हमें जीवन में कभी अकस्मात एक कारण ही दंडित कर दिया हो किंतु हमारे किसी अंग को हमसे छीन कर हमें उससे वंचित तो नहीं किया फिर भी हमने से कौन ऐसा मानव है जो अपनी युक्ति के कठिन समय में विधाता को दोषी नहीं ठहरा था मैंने कभी पिछले ही महीने एक ऐसी अभिशप्त का या देखी है से विधाता ने कठोरता दंड दिया किंतु उसे वह नतमस्तक आनंदी मुद्रा में खेल रही है विधाता को ऑस्कर नहीं

उसकी कोठी का आहट एकदम हमारे बंगले के हाथों से जुड़ा था अपनी शानदार कुर्ती में पहली बार कार से उतरते देखा तो आखिरी से देखती ही रह गई कार का द्वार खुला  एक नोएडा में उतर कर पिछली सीट से वीर्य निकाल कर सामने रख दी और भीतर चले गए दूसरे की शरण धीरे-धीरे बिना किसी सहारे के कार से एक युवती ने अपने निर्जीव नीचे ले दर्द को बड़ी लग सकता से नीचे उतारा वे साथियों से व्हील चेयर तक पहुंच गई और बड़ी आस्था से उसे शिवम चलाती कोटी के भीतर चली गई मैं फिर नीचे नियत समय पर उसका यह आवागमन देखती है और आशीष चकित रह जाती थी जैसे कोई मशीन बटन कट कट आती अपना काम की चली जा रही हो

धीरे धीरे मेरा उसे परिचय हुआ कहानी सुनी तो दंग रह गए नियति के प्रति कठोर अगस्त को प्रति मानवीय थे एवं सा से जल्दी वह बीते भर की लड़की मुझे किसी देवांगना से कम नहीं लगी मैं चाहती हूं कि मेरी पंक्तियों को उदास आंखों वाला वह गोरा कितने वर्षों से लखनऊ का मैं दावे योग ने कुछ माह पूर्व अपनी बहन के यहां देखा था आईएएस की परीक्षा देने इलाहाबाद गया लौटते समय किसी स्टेशन पर चाय लेने उतरा की गाड़ी चल पड़ी चलती ट्रेन में हाथ के कुल्हड़ सही करने के प्रयास में गिरा और पहिए के नीचे हाथ पड़ गया प्राण तो बच गए पर दया हाथ चला गया उसी बीच इन पूजा के साथ-साथ धीरे धीरे वह मानसिक संतुलन भी खो बेटा दुख बुलाने के लिए 10वीं की गोलियां खाने लगा केवल एक हाथ खोकर ही उसने हथियार डाल दिए इधर चंद्रा जिस का निचला धन है निज प्राण मांसफील्ड मात्र सदा फुल है चेहरे पर विषाद किए गए कभी नहीं बुद्ध दीप दीप अंकों में एक अदमी उत्साह है प्रति प्रति क्षण भर पुर जीने की उत्तम जी जैसा और फिर कैसी कैसी बेहतर कौन सा है

मैडम आप लखनऊ जाते ही क्या मुझे ड्रिंक्स रिसर्च इंस्टीट्यूट से पूछ कर यह बताएंगे कि क्या वहां आने पर विशेष माइक्रोबाइलोजी से संबंधित कुछ सामग्री मिल सकेगी

मैडम आप कह रही थी कि आपके दामाद हवाई के ईस्ट वेस्ट सेंटर में है क्या आप इन्हें मेरा बायोडाटा भेज कर पूछ सकेंगे कि मुझे वहां की कोई फेलोशिप मिल सकती है

यहां कभी सामाजिक हड्डी टूटने पर या मोच आने घर ही पुराने सेकंड गत हो जाते हैं जैसे रितिका काशी सिर पर टूट पड़ा है और इधर यह लड़की है कि पुरानी जिला दर्शन है फिर भी मोटी मोटी लग रही है नौकरी की एक ही नीरस करवट में उसकी प्रतिभा निरंतर डूबती जा रही है आजकल वे आईआईटी मद्रास में काम कर रही है

जन्म के 18 महीने में ही जिसकी गर्दन से नीचे का पूरा शरीर पोलियो से निर्जीव कर दिया है उसने किस अदभुत साहस है नियति को अंगूठा दिखा अपनी किसी पर डॉक्टर एटी होगी

मैडम मैं चाहती हूं कि कोई मुझे सामान्य सा सारा भी मैं दे आप तो देखती है मेरी मां को मेरी कार चलानी पड़ती है मैंने इसी से एक ऐसी कार का नक्शा बना कर दिया है जिससे मैं अपने पैरों के नीचे अस्तित्व को भी संजीव बना दूं यह देखी मैंने अपनी प्रयोगशाला में अपना संचालन कैसे सुगन बना लिया है मैं अपना सारा काम अब लिखना लेती है


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