Thursday, November 1, 2018

नरेंद्र से विवेकानंद में रूपांतरण

नरेंद्र से विवेकानंद

         प्रख्यात अंग्रेज कवि विलियम वर्ड्सवर्थ की एक प्रसिद्ध कविता है एक्स करसन एक बार प्रोफेसर एसटी छात्रों के समक्ष इस कविता की व्याख्या करें थे समाधि जैसे महत्वपूर्ण शब्द की व्याख्या करते समय प्रोफेसर साहेब ने दक्षिणेश्वर मंदिर के पुजारी श्री रामकृष्ण परमहंस का उल्लेख किया इसी संदर्भ को आगे बढ़ाते हुए प्रोफ़ेसर साहब ने बताया कि श्री रामकृष्ण अक्सर समाधि की स्थिति में आ जाते हैं ट्रांस एक प्रकार का आनंद में आध्यात्मिक अनुभव है इसी संदर्भ में यह जाना उचित होगा कि श्री रामकृष्ण ईश्वर की उपासना जगन माता के रूप में करते थे वे देवी की उपासना दक्षिणेश्वर में काली की मूर्ति के रूप में किया करते थे मूर्ति पूजा द्वारा ईश्वर का साक्षात्कार करने के रूप में किया करते थे मूर्ति पूजा द्वारा ईश्वर का साक्षात्कार करने के उनके इस विचार में मूर्ति पूजा विरोधी आंदोलन को एक घातक आघात पहुंचाया इसके पूर्व भी नरेंद्र ने श्री रामकृष्ण के विषय में सुन रखा था इस संत के बारे में उनके अपने कुछ संडे थे लेकिन जब उन्होंने प्रोफेसर एसपी से भी उनके विषय में सुना तो वे दक्षिण किस सन से वेट करने को आतुर हो उठे

        ऐसा कहा जाता है कि जाड़े की एक दोपहर में 15 जनवरी 1822 रविवार को नरेंद्र श्री रामकृष्ण परमहंस से वेट करने गए श्री रामकृष्ण परमहंस से नरेंद्र की ऐतिहासिक भेट थी यह उनके जीवन का एक नया मोड़ था क्योंकि उसके बाद में नरेंद्र के जीवन का सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्रारंभ हुआ उनका जीवन सामान्य कार्य के लिए डालना था कुछ अत्यधिक शक्तिशाली एवं गति से जीवन के लिए वह जीवन क्या था वह था नरेंद्र नाथ का स्वामी विवेकानंद में रूपांतरण श्री राम कृष्ण की नरेंद्र से प्रथम बैंड ही उनके लिए आनंदमय और रोमांचकारी थे ऐसा प्रतीत हुआ की श्री राम कृष्ण की सत्य शीशे की खोज ईश्वर द्वारा आज पूरी हो गई ऐसा उन्होंने भावेश में अगर घोषित किया वह मेरे प्यारे पुत्र में कब से तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहा हूं श्री रामकृष्ण से उनकी इस ऐतिहासिक भीड़ के बारे में हमें यह जाना चाहिए कि हम नरेंद्र ने क्या कहा मैंने इस व्यक्ति के विषय में सुना और उनसे पेंट करने गया वह देखने में बिल्कुल एक सामान्य व्यक्ति प्रति हुए इन के विषय में कुछ उल्लेखनीय नहीं था उन्होंने सीधी सरल भाषा प्रयोग किया मैंने सोचा क्या यह व्यक्ति एक महान ग्रुप हो सकता है मैं उनके निकट बढ़ता गया और वही प्रश्न पूछा जो मैं दूसरों से जीवन भर पूछता रहा था |

         श्रीमन क्या आप ईश्वर में विश्वास रखते हैं उत्तर मिला हां कैसे क्योंकि मैं उसे देखता हूं ठीक वैसे ही जैसे तुम्हें जो देख रहा हूं

         उनके इन उत्तर में मुझे तुरंत प्रभावित किया यह प्रथम अवसर था जब मैंने एक ऐसे व्यक्ति को पाया जो कहने का साहस रखता था कि उनसे ईश्वर को देखा हैौ
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