Friday, November 2, 2018

नगर निगम सर्वोच्च शहरी निकाय में राजस्थान में 74 वें संविधान संशोधन की अपेक्षाओं के अनुरूप प्रत्येक बेहतर नगरी क्षेत्र में नगर निगम की स्थापना की जाती थी

नगर निगम सर्वोच्च शहरी निकाय है राजस्थान में 74 वें संविधान संशोधन की अपेक्षाओं के अनुरूप 172 नगरीय क्षेत्रों में नगर निगम की स्थापना की जाती है वर्तमान में राजस्थान के सभी सात संभाग मुख्यालय जयपुर जोधपुर कोटा अजमेर बीकानेर जयपुर एवं भरतपुर के नगर निगम गठित किया गया है संगठनात्मक दृष्टि से जयपुर सबसे बड़ा नगर निगम है नगर निगम एक निगमित निकाय है जिसका सास्वत उत्तराधिकारी होता है उसकी एक सामान्य मुहर होती है वह निगमित नाम से वादे चला सकता है नगर निगम का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है

नगर निगम के आंतरिक संगठन के अंतर्गत परिषद महापौर उपमहापौर मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निगम आयुक्त तथा समितियां होती है राज्य सरकार नगर निगम को जनसंख्या के आधार पर प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों में विभक्त करती है इन प्रादेशिक चित्रों को वार्ड कहा जाता है वार्ड नो के पुलिस थानों में से अनुसूचित जनजाति अनुसूचित जाति अन्य अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए जनसंख्या के अनुपात में वह महिलाओं के लिए नियमानुसार स्थान चक्र अनुसार के आधार पर आरक्षित किए जाते हैं प्रति वार्ड से एक सदस्य प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा व्यक्त मताधिकार के आधार पर निर्वाचित किया जाता है राज्य में 74 वें संविधान संशोधन के नगर निगम के अब तक पांचवा चुनाव संपन्न हुए हैं

महापौर उपमहापौर नगर निगम के अध्यक्ष को और उपाध्यक्ष को क्रम से महापौर उपमहापौर कहा जाता है नगर निगम के सदस्य अपनों में से किसी एक को महापौर वह एक उपमहापौर निर्वाचित करना है महापौर उपमहापौर के पदों में भी आरक्षण की व्यवस्था रखी है महापौर नगर क्या प्रथम नागरिक होता है जिसका कार्यकाल 5 वर्ष होता है मृत्यु पद त्याग अथवा सदस्यों द्वारा अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के 12 पद समय से पूर्व भी रिक्त हो सकता है पद रिक्त होने पर शेष अवधि के लिए निगम के सदस्य अपने में से पुणे महापौर उपमहापौर निर्वाचित कर लेते हैं महापौर नगर निगम की बैठकों की अध्यक्षता करता है महापौर मुख्य कार्यकारी अधिकारी से नगर निगम से संबंधित कोई प्रतिवेदन अथवा जानकारी प्राप्त कर सकता है महापौर की अनुपस्थिति में उप महापौर द्वारा सभी कार्य संपन्न किए जाते हैं

हां जी सरकार की ओर से नगर निगम में एक मुख्य कार्यपालक अधिकारी एवं सहयोग के लिए आयुक्तों की नियुक्ति की जाती है मुख्य कार्य पालिका अधिकारी नगर परिषद की स्थाई समितियों की बैठक में हिस्सा ले सकता है निगम के अभिलेख दस्तावेज एवं बजट उसकी देखरेख में तैयार होते हैं यह परिषद द्वारा निर्वाचित नीतियों निर्मित कानूनों और सभी करते निभाता को अपने परिवार में क्रियान्वित करने के लिए उत्तरदाई होता है निगम के समस्त अधिकारी और कर्मचारी उनके प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करते हैं नगर निगम के कार्य को सुगम तरीके से चलाने के लिए अधिनियम में विभिन्न समितियों के गठन का प्रावधान किया गया है

मारी पालिका सीमित संगठन का निम्न प्रकार होगा महापौर उपमहापौर परिषद में विपक्ष के नेता परिषद द्वारा निर्वाचित सदस्य दिन में 2 महीने हो तथा मुख्य कार्यपालिका अधिकारी पदेन सचिव होता इसके अलावा वित्त समिति स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समिति भवन निर्माण कार्य समिति नियम समिति का गठन किया जाता है इन समितियों की जा सकती है
नगर निगम के कार्य नगर निगम समिति तीन प्रकार के कार्यों को संपन्न करता है अनिवार्य एक विशेष कार्य अनिवार्य कार्य में निगम द्वारा आवश्यक रूप से किए जाने वाले कार्यों में सम्मिलित हैं जैसे शुद्ध जल का प्रबंध सार्वजनिक विद्युत का प्रमंडल नालियों के निर्माण एवं शौचालय का निर्माण रखरखाव सार्वजनिक मार्गों का निर्माण एवं रखरखाव व नामकरण गंदी कूड़े करकट की सफाई जन्म एवं मृत्यु का लेखा-जोखा शमशान ओं का प्रबंध एवं नियम प्राथमिक शिक्षा की व्यवस्था खतरनाक भवनों का निरापद बनाना इतना व्यापार निगम संपत्ति को देखे खाद्य पदार्थों का नियम तथा वार्षिक प्रतिवेदन ओं का प्रकाशन आदि
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