Wednesday, October 31, 2018

एक इंसान के दुख का विवरण

दु:ख
जिसे मनुष्य सर्व अपेक्षा अपना समझ भरोसा करता है जब उसी से अपमान और तिरस्कार प्राप्त हो तब मन कृष्णा से भर जाता है एक कदम मर जाने की इच्छा होने लगती है इसे शब्दों में बता सकना संभव नहीं

दिल्ली ने हेमा को पूर्ण स्वतंत्रता दी थी वह उसका कितना आदर करता था कितनी आंतरिक ता सेवर उसके प्रति शयन व्रत था बहुत से लोग इसे अति कहेंगे इस पर जब भी जब वे हेमा को संतुष्ट नहीं कर सका और हेमा केवल डिलीट की उसकी सहेली के साथ सिनेमा देख आने के कारण दिन भर उठी एक दूसरे ही दिन मां के घर चली गई तब दिलीप के मन में क्षोभ का अंत न रहा

सितंबर का अंतिम सप्ताह था वर्षा की ऋतु बीत जाने पर भी दिन भर पानी बरसता रहा दिलीप बैठक की खिड़की और दरवाजे पर परदे डाले बैठा था वित्त रचना और ग्लानि में समय यात्रा बन जाता है 1 मिनट गुजरना मुश्किल हो जाता है समय को बिताने देख दिलीप खींचकर सो जाने का यत्न करने लगा इसी समय जिन्हें पर से छोटे भाई के दम दम करती चले आने का शब्द सुनाई दिया अलसाई हुई आंख को आधा खोल उसने दरवाजे की ओर देखा छोटे भाई ने पर्दे को हटाकर पूछा भाई जी आपको कहीं जाना नहीं हो तो मोटरसाइकिल ले जाऊं इसलिए छुटकारा पाने के लिए इतने हाथ के इशारे से इजाजत दी

दीवार पर टंगी घड़ी ने कमरे गुंजाते हुए 6:00 बजे जाने को सूचना दी दिल्ली पॉर्न बबुआ क्या दे वही कह दे पड़ा रहेगा उठकर खिड़की का पर्दा हटा कर देखा बारिश थम गई थी अब उसे दूसरे में हुआ कोई भी बैठेगा और  एक प्रिय चर्चा चला देगा
वह उठा भाई की साइकिल ले गली के कीचड़ से बचाता हुआ और उससे अधिक लोगों की निगाहों से छिपता हुआ मेमोरी दरवाजे से बाहर निकल शेर की पुरानी फसल के भाग से होता हुआ मिंटो पार्क जा पहुंचा उस लंबे चौड़े मैदान में पानी से भरी घास पर पछुआ के तेज झोंके में जुड़ने के लिए इस समय कौन आता

उस एकांत में एक बेच के सहारे साइकिल खड़ी कर वह बैठ गया सिर से टोपी उतार बेंच पर रख दी सिर में ठंड लगने से मस्तिष्क की व्याकुलता कुछ कम हुई

क्या लाया यदि ठंड लग जाने से वह बीमार हो जाए उसकी हालत खराब हो जाए तो वह चुपचाप शहीद की तरह अपने दुख को अकेला ही सहेगा किसी को अपने दुख का भाग लेने के लिए नहीं बुलाएगा एक दिन मृत्यु दबे पांव आएगी और उसके रोग के कारण हृदय की व्यथा और रोग को ले उसके सिर पर सांत्वना का हाथ पैर उसे शांत कर चली जाएगी उस दिन जो लोग रोने बैठे उम्र में हेमा भी होगी उस दिन उसी को कर हेमा अपने नुकसान का अंदाजा कर अपने व्यवहार के लिए पछताएगी यही बदला होगा दिलीप के चुपचाप दुख सहते जाने का विचार कर उसने संतोष का एक दीर्घ निश्वास लिया करवट बदल ठंडी हवा खाने के लिए वह बैठ गया

समीर 3 फर्लांग तक मुख्य रेलवे लाइन से कितनी ही गाड़ियां गुजर चुकी थी उधर दिलीप का ध्यान ले गया था अब जब फ्रंटियर मेल तूफान तीन व्यक्ति कोलाहल करती हुई गुजरी तो दिलीप ने उस और देखा लगातार फर्स्ट और सेकंड के डिब्बे से निकलने वाले तीनों प्रकार से समझ गया एयर मेल जा रही है 9:30 बज गए

श्याम से इंजॉय के प्रति का की एक संभावना देख उसका मन हल्का हो गया था वह लौटने के लिए उठा शरीर में कुछ चाहिए बाकी रहने के कारण साइकिल पर ले चक में पैदल-पैदल बाग बाग बादशाही मस्जिद से नक्सली दरवाजे और टकसाली से भाटी दरवाजे पहुंच मार्ग में शायद ही कोई व्यक्ति दिखाई दिया हो सड़क किनारे खड़े बिजली के लिए निष्काम और निर्विकार भाव से अपना प्रकाशक पर डाल रहे थे मनुष्य के अभाव की कुछ भी परवाह न कर लाखों पतंगे बांध बांध कर इनके चारों और नृत्य कर रहे थे और जगत के यह अदभुत होने से प्रत्यय पतंगा एक नक्षत्र की पूर्ति अपनी मांग पर चक्कर काट रहा था कोई छोटा कोई बड़ा दायरा बना था कोई दान को कोई बायको कोई आगे को कोई विपरीत गति में निरंतर चक्कर काटते चले जा रहे थे कोई किसी से टकराता नहीं वृक्षों की विज्ञप्ति बिजली के प्रकाश में चमचमा रहे थे

एक लैंप के नीचे से आगे बढ़ने पर उसकी छोटी परछाई उसके आगे फैलती चलते जनजीवन से आगे बढ़ता परछाई पलट कर पीछे हो जाती बीच-बीच में वृक्षों की टहनियों की परछाई उसके ऊपर से होकर निकल जाती सड़क पर बड़ा प्रत्येक बीघा पता लेंबो की किरणों का उत्तर दे रहा था दिल्ली एक सोच रहा था मनुष्य के बिना भी संसार कितना व्यस्त और रोचक है

कुछ कदम आगे बढ़ने पर सड़क किनारे नींबू के वृक्षों की छाया ने कोई श्वेत सी चीज दिखाई दिए कुछ और बनने पर मालूम हुआ कोई छोटा सा लड़का सफेद कुर्ता पायजामा पहने एक खाली सामने रखे कुछ बेच रहा था

बचपन में गली मोहल्ले के लड़कों के साथ उसने अक्सर कौन से वाले से सौदा खरीद कर खाया था अब वह इन बातों को भूल चुका था परंतु इस सर्दी में सुनसान सड़क पर जा कोई आने वाला नहीं यह खोमचा बेचने वाला कैसे बैटा है

खोमचे वाले के शुद्ध शरीर और भाइयों ने भी उसका ध्यान आकर्षित किया उसने देखा रात में सोता बेचने निकलने वाले इस सौदागर के पास मिट्टी के तेल की डिग्री तक नहीं समीप आकर उसने देखा वह लड़का सर्द हवाओं में सिकुड़ कर बैठा था दिलीप के समीप आने पर उसने आशा की एक निगाह उसकी ओर डाली और फिर आंखें झुका ली

दिलीप ने और ध्यान से देखा लड़के के मुख पर खोमचा बेचने वालों की चतुर तने थी बल्कि उसकी जगह थी एक कायरता उसकी थाली भी खोमचे का थाल ने होकर करेली व्यवहार की एक मामूली हल्की मुरादाबादी थाली थी राजू भाई ने ही थाली में कागज के टू लूपर पकड़ो के बराबर रबर डोरियां लगाकर  रख दी गई थी


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